सिंघाड़ा खाने के फायदे और नुकसान – Singhara Benefits & Side Effects in Hindi

सिंघाड़ा खाने के फायदे और नुकसान: दिखने में थोड़ा अजीब लेकिन पानी से लतपत यह फल हमारी सेहत के लिए काफी लाभकारी होता है। यह हमारे शरीर के कई बिमारियों को ठीक करने में मदद करता है। इस फल को धार्मिक दृष्टि से पवित्र माना जाता है। इसलिए इसे व्रत-उपवास में खाने की सलाह दी जाती है। मन जाता है की सिंघाड़े (Water chestnut) के तीन कोने ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं। इसमें विटामिन A, B और C प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा यह खनिज लवण और कार्बोहाइड्रेट के गुणों से भी भरपूर होता है। यह आपके शरीर को स्वस्थ रखने के लिए कितना फायदेमंद है इसके बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं।आइये जानते हैं सिंघाड़ा खाने के फायदे और नुकसान – Water Caltrop (Singhara) Benefits and Side Effects in Hindi.

सिंघाड़े में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, आयरन, फास्फोरस, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे गुणवादी पौष्टिक पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। आजकल के विज्ञानं के मुताबिक इस फल को ताकतवर और पौष्टिक फल मन जाता है। इसमें भैंस के दूध के मुकाबले 25% ज्यादा मिनरल्स होते हैं।

सिंघाड़े खाने के फायदे – Singhara Khane Ke Fayde in Hindi

पोषक तत्वों से भरपूर

सिंघाड़े में कई उच्च मात्रा में पोषक तत्व होने के कारण स्वस्थ्य के लाभदायी इस फल को आप रोजाना अपने आहार में ले सकते हैं। अगर आपको भूख नहीं लगती तो यह फल बहुत ही फायदेमंद होता है। बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह फल काफी गुणकारी होता है। यह फल ह्रदय रोग, गठिया, अल्सर, शुगर जैसे रोगों से बचाव करने में काफी लाभदायक होता है।

पीलिया रोग में फायदेमंद

पीलिया रोगी के लिए यह फल काफी फायदा वाला होता है क्यूंकि इसमें डिऑक्सीफाइंग प्रॉपर्टीज होती है। इस फल के जूस पीने से शरीर से सरे विषाक्त पदार्थ शरीर से बाहर निकल जाते हैं। सिंघाड़े में जीवाणुरोधी, एंटीवायरल, कैंसर विरोधी और एंटीऑक्सीडेंट्स की शक्ति होती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए बेहतर

काफी बार गर्भाशय की कमजोरी और पित्त की बढ़ोतरी से गर्भावस्था पूरी होने से पहले ही महिलओं का गर्भपात हो जाता है, जिससे वे बहुत नाखुश होते हैं ऐसे में उन महिलाओं को सिंघाड़ा खाना काफी लाभदायक होता है। इसके सेवन करने से पेट में पल रहे भ्रूण को अच्छी मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं। 6 स 7 महीने के गर्भवती महिला को दूध के साथ या सिंघाड़े का हलवा खाने से काफी लाभ मिलता है।

सिंघाड़ा का सेवन गले की समस्या से निजात

गले की कोई भी समस्या के लिए सिंघाड़ा काफी अच्छा घरेलू उपचार है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो गले का बैठना, गले की खराश, गले की टांसिल आदि से निजात दिलाने में काफी मददगार है। सिंघाड़े आता को दूध में मिलकर खाने से गले के सारी समस्याओं का जल्द ही निपटारा हो जाता है।

दाद-खुजली को दूर

शरीर में दाद होने से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है इस समस्या से निजात पाने के लिए नीबूं के रस में सूखे सिंघाड़े को घीस कर दाद वाली जगह पर रोजाना लगाएं, इससे आपको काफी आराम मिलेगा। यह घरेलु इलाज आपका काफी फायदेमंद होगा। हलाकि थोड़े समय आपको इस प्रयोग को करने से थोड़ी जलन महसूस होगी लेकिन बाद में ठंडक महसूस होगी।

नींद न आने की समस्या दूर करे

अगर आपको रात को नींद नहीं आती है या बार-बार आपकी नींद खुल जाती है तो इसके लिए सिंघाड़ा आपके लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। सिंघाड़ने में पॉलीफिनॉलिक और फ्लेवोनॉयड जैसे एंटी-ऑक्सीडेंट पाए जाते हैं जो अनिंद्रा की समस्या को दूर करने में काफी हद तक सहायक होते हैं।

बवासीर की समस्या दूर करे

जिन व्यक्तियों को बवासीर की समस्या है उनके लिए सिंघाड़ा काफी फायदेमंद होता है। बवासीर की समस्या होने पर अगर आप नियमित रूप से सिंघाड़ा खाएं तो इस परेशानी से बचा जा सकता है। कच्चे सिंघाड़े का सीजन न होने पर आते की रोटियां भी खायी जा सकती हैं।

यूरिन इन्फेक्शन में मददगार

यूरिन से समन्धित कोई भी समस्या के लिए सिंघाड़ा काफी मददगार होता है। सिंघाड़े को कच्चा खाने से शरीर से विषैले पदार्थ शरीर से आसानी से बाहर निकलते हैं। इसके जूस को नियमित रूप से लेने पर यह यूरीन इन्फेक्शन को भी रोकता है। इसलिए अगर आप पेशाब वाली कोई भी समस्या से बचना चाहते हैं तो अपने आहार में सिंघाड़े को शामिल करें।

पेट की समस्या से छुटकारा

पेट की सारी परेशानियां गलत खान-पान और पेट में गर्मी के कारण होती है। सिंघाड़ा की ठंडक के जरिये हमारे पेट में सीतलता आने लगती है और साथ ही हमारी प्यास को बुझाने में भी कारगर होता है। इसलिए अगर आपको दस्त या गैस की समस्या हो तो आप को इस फल का सेवन करके काफी अच्छा महसूस कर सकते हैं।

थायराइड और घेंघा रोग के लिए

सिंघाड़े फल में मौजूद आयोडीन और मैगनीज की प्रचुर मात्रा होने से यह थाइरोइड और घेंघा जैसी रोगों को कम करने में काफी मददगार होता है। गले में खराश या गाला बंद सारे परेशानियों को दूर करने में यह अग्रणी होता है।

बच्चों की बिस्तर में पेशाब की समस्या से निजात करे सिंघाड़ा

बच्चे अक्सर बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं। बहुत से बच्चे तो काफी उम्र होने के बाद भी इस समस्या को पैदा कर देते हैं ऐसे बच्चों के लिए सूखे सिंघाड़े और शक्कर को 40-40 ग्राम मिले लें, और इस चूर्ण की चुटकी भर मात्रा पानी के साथ सुबह-शाम बच्चे को पिलायें। इसके कुछ दिन तक सेवन करवाने से बिस्तर में पेशाब करने की समस्या दूर हो जाएगी।

यौन कमजोरी दूर करे सिंघाड़ा

सिंघाड़े के सेवन करने से सेक्स पावर में बढ़ोतरी आती है। आजकल के समय में दिमागी काम करने से यह समस्या कई मर्दों में आती है। ऐसे में आप 3-4 चम्मच सिंघाड़े का आटा खा कर दूध पीने से वीर्य बढ़ता है। जानकारी से पता चला है कि सिंघाड़े के आते में बबूल की गोंद, देशी घी और मिश्री का मिश्रण के 30 ग्राम रोजाना दूध के साथ लेने से वीर्य की कमी को पूरा किया जा सकता है।

सिंघाड़ा खाने से नुकसान – Singhara Khane Se Nuksan In Hindi

  • सिंघाड़ा का अधिक सेवन करने से पेट दर्द, आँतों में सूजन और कब्ज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • अधिक सिंघाड़े का उपयोग करने से पाचन तंत्र को प्रभावित करता है।
  • सिंघाड़े के सेवन के तुरंत बाद पानी पीने से खांसी और कफ होने की संभावना रहती है।

FAQ about सिंघाड़ा (Water chestnut)

सिंघाड़े में कौन सा विटामिन पाया जाता है?

सिंघाड़े में भरपूर मात्रा पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे विटामिन-ए, सी, मैंगनीज, थायमाइन, कर्बोहाईड्रेट, टैनिन, सिट्रिक एसिड, रीबोफ्लेविन, एमिलोज, फास्फोराइलेज, एमिलोपैक्तीं, बीटा-एमिलेज, प्रोटीन, फैट और निकोटेनिक एसिड।

सिंघाड़े खाने से क्या फायदा होता है?

सिंघाड़े को नियमित रूप से खाने से सांस, बवासीर, फटी एड़ि‍यां, दर्द या सूजन (लेप बनाकर) संबधी समस्याओं से भी आराम मिलता है.

सिंघाड़ा कैसे खाएं?

सिंघाड़े को कच्चा या उबाल कर नमक के साथ भी खा सकते है। सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल हलवा वगैरह बनाने में किया जाता है।

सिंघाड़े कितने प्रकार के होते हैं?

वाटर चेस्टनट के कम से कम तीन प्रमुख प्रकार हैं: चीनी, यूरोपीय और भारतीय।

सिंघाड़े की तासीर क्या होती है?

सिंघाड़े की तासीर ठंडी हॉट होती है। यह शरीर को ऊर्जा देता है, इसलिए इसे व्रत के खाने में शामिल किया जाता है.

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