टीबी का घरेलु इलाज – कारण, लक्षण और उपचार

T.B. का घरेलु इलाज हम आपको नीचे बताएँगे, लेकिन पहले आपको टीबी होने के प्रमुख कारण और इसके लक्षण जानने बहुत जरूरी हैं जिनसे आप इससे बच सकते हैं और इसका सही तरीके से निवारण कर पा सकते हो। टीबी एक ऐसी बीमारी है जो एक बार अगर किसी को हो जाए तो पीडियों तक होते जाता है। यह एक संक्रामक रोग है जो फेफड़ों को नुक्सान पहुँचता है। लेकिन यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। अगर सही समय पर आपने टीबी का इलाज नहीं किया तो आप पूरी ज़िन्दगी परेशान रहेंगे और यही नहीं यह आपके बच्चों में फैलते रहेगा। इसलिए आपको हम जो भी टीबी के लक्षण बताने जा रहे हैं उन लक्षणों में से आपको कोई भी समस्या है तो आप doctor से checkup जरूर करवाएं।

TB ke Karan Lakshan & Gharelu Ilaaj - टीबी का घरलू इलाज

टीबी रोग के लिए घरेलू आयुर्वेदिक उपचार

टीबी के आम लक्षण के लिए कोई भी घरेलू नुस्खा तब तक काम नहीं आता है जब तक आप अच्छा परहेज और नियमित तौर पर बताई गई घरेलू दवाई नहीं लेते। आइये जानते हैं टीबी बीमारी के प्रमुख लक्षण।

टीबी रोग होने के कारण:

  • साफ-सफाई नहीं रखना या मदिरापान, धूम्रपान करना टी.बी इन्फेक्शन का कारण हो सकता है।
  • गाय का कच्चा दूध पीने से टी.बी होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • रोगी के सम्पर्क में रहने या उसकी वस्तुओं का उपयोग करने से भी रोग होता है।
  • शरीर में पोषण की कमी व लंबे समय तक जंक फूड के इस्तेमाल से टी.बी के बैक्टेरिया अटैक कर सकते हैं।
  • मीजल्स,न्यूमोनिया और एचआईवी पॉजिटिव होना भी टी.बी का कारण हो सकता है।
  • गलती से रोगी का खून अन्य किसी रोगी के शरीर में चढ़ाने से वह व्यक्ति रोगग्रस्त हो जाता है।
  • कपड़ा मिल में काम करने वाले श्रमिकों को यो रोग होने की ज्यादा संभवाना होती है, क्योंकि कपड़ो के रेशे-रोएं सांस लेते वक्त उनके अंदर प्रवेश कर जाते हैं।

TB रोग का प्रमुख लक्षण 

  • शरीर में कमजोरी और थकावट का महसूस होना।
  • लम्बे समय से खांसी का होना।
  • शरीर का वजन कम होना और शरीर में दर्द की समस्या।
  • खांसी में बलगम और खून का आना।
  • खासी के साथ उलटी का आना।
  • सांस लेते समय छाती में दर्द का होना।
  • शाम के समय बुखार का आना।
  • रात के समय पसीना आना।
  • भूख की कमी

टीबी रोग का घरेलू उपचार – Home Remedies of TB in Hindi

टीबी की बीमारी होने पर आपको जितना भी हो बचकर रहना है। अब हम आपको कुछ ऐसे घरेलु उपाय बताने जा रहे हैं जिनकी मदद से आप इस खतरनाक बिमारी को दूर कर सकते हैं।

1. लहसुन के प्रयोग से

लहसुन में सल्फ्यूरिक एसिड होते है जो टीबी के बैक्टीरया को नष्ट करने में मदद करता है। इसे कच्‍चा या पका कर कैसे भी खा सकते हैं। इसे खाने का एक तरीका है कि 10 लहुसन की कलियों को एक कप दूध में उबाल लें। फिर उबली हुई कलियों को चबा कर खा लें और ऊपर से दूध पी लें। ऐसा कुछ दिनों के लिये करें। पानी ना पियें नहीं तो यह असर नहीं करेगी।

2. आंवला टीबी की बीमारी के लिए

आंवला में उच्च एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो टीबी के बैक्टीरिया को नष्ट करने में मदद करता है। यह शरीर को कई तरह के पोषण पहुंचा कर उसे मजबूती प्रदान करता है। इसका जूस निकाल कर उसमें एक चम्‍मच शहद मिला कर रोजाना खाली पेट पीन से यह बीमारी दूर होती है

3. टीबी का उपचार पुदीना के साथ

इसमें एंटी बैक्‍टीरियल गुण होता है जो कफ से निजात दिलाता है। यह फेफडे़ को भी खराब होने स बचाता है। आधा कप गाजर के जूस में, 1 चम्‍मच पुदीने का रस, 2 चम्‍मच शहद और 2 चम्‍मच शुद्ध सिरका मिलाएं। इस मिश्रण को तीन भाग में बांट लें और हर एक घंटे में पियें।

4. ग्रीन टी

ग्रीन टी को पानी में अच्‍छी तरह से उबाल कर पियें। यह उस बैक्‍टीरिया का खात्‍मा करती है जो टीबी को पैदा करता है। साथ ही यह हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमताओं को बढ़ाती भी है।

5. काली मिर्च

काली मिर्च फेफड़े की सफाई करती है और टीबी की वजह से होने वाले दर्द को दूर करती है। 10 काली मिर्च के दाने को घी के साथ फ्राई कर लें। फिर उसमें एक चुटकी हींग पावडर डाल कर मिक्‍स कर के ठंडा कर लें। मिश्रण को 3 भाग में बांटें और एक डोस को हर एक घंटे में चबाएं।

6. केला

केले में अच्‍छी मात्रा में कैल्‍शियम पाया जाता है जिससे टीबी के रोगियों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह कफ और बुखार को दूर भगाता है। रोगी को 1 गिलास कच्‍चे केले का जूरोजाना पीना चाहिये।

7. सहजन की फली

सहजन की फली में जीवाणु नाशक और सूजन नाशक तत्व होते हैं। टीबी के जीवाणु से लड़ने में मदद करता है। मुट्ठी भर सहजन के पत्ते एक गिलास पानी में उबालें। नमक,काली मिर्च और निम्बू का रस मिलाएं। रोज सुबह खाली पेट सेवन करें। सहजन की फलियाँ उबालकर लेने से फेफड़े को जीवाणु मुक्त करने में सहायता मिलती है।

टीबी रोग से बचाव घरेलु इलाज  – TB Treatment At Home in Hindi

  • दो हफ्तों से अधिक समय तक खांसी रहती है, तो डॉक्टर को जरूर दिखाएँ।
  • गंदे पब्लिक टॉयलेट्स में जाने से परहेज करें।
  • आपके आस-पास कोई बहुत देर तक खांस रहा है, तो उससे दूर रहें।
  • अगर आप किसी बीमार व्याक्ति से मिलकर आ रहे हैं तो अपने हाथों को ज़रूर धो लें।
  • पौष्टिक आहार लें जिसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन्स, मिनेरल्स,
  • कैल्शियम, प्रोटीन और फाइबर हों क्योंकि पौष्टिक आहार हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाता है।
  • दूसरों से अपना पर्सनल सामान जैसे towel, रुमाल, ब्रश आदि शेयर करने से परहेज करें खास कर जब आपको या सामने वाले को tb की शिकायत हो।
  • अगर आपको अधिक समय से खांसी है,तो बलगम की जांच ज़रूर करा लें।
  • खांसी या जुकाम होने पर अपनी ही रुमाल का इस्तेमाल करें।
  • अपनी साफ़ सफाई का ध्यान दें और बाहर से आने के बाद अपने हाथों को एंटी बैक्टीरियल सोप से धोना न भूलें।
  • कहीं भी बाहर से आने के बाद हाथ व पैरों को अच्छे से धोना नहीं भूलें।
  • बच्चों को बीसीजी का टीका जरुर लगवाएं इससे भविष्य में उसे टी.बी होने की संभावना नहीं रहेगी।

टीबी के इलाज के लिए घरेलू नुस्खे 

  1. रोज़ सुबह और शाम को जब पेट खाली हो, आधा कप प्याज का रस एक चुटकी हींग डाल कर पिए, एक सप्ताह में फर्क दिखेगा।
  2. पीपल वृक्ष की राख 10 ग्राम से 20 ग्राम तक बकरी के गर्म दूध में मिला कर प्रतिदिन दोनो समय सेवन करने से यह रोग जड़ से समाप्त हो जाऐगा।
  3. शहद 200 ग्राम, मिश्री 200 ग्राम, गाय का घी 100 ग्राम, तीनो को मिला लें। 6-6 ग्राम दवा दिन में कई बार चटाऐं। ऊपर से गाय या बकरी का दूध पिलाऐं। तपेदिक रोग दूर हो जायेगा।
  4. पत्थर के कोयले की राख (जो एकदम सफेद हो) आधा ग्राम, मक्खन मलाई अथवा दूध से प्रातः व सांय खिलाओं ये राम बाण है। टी.बी. के जिन मरीजों के फेफड़ों से खून आता हो उनके लिए यह औषधि अत्यंत प्रभावी है।
  5. एक गिलास गाय के दूध में आधा चम्मच गाय का घी और एक चम्मच हल्दी डाल कर गर्म कीजिये और इसको सोने से पहले पिए। तपेदिक के रोगियों को दवा के साथ ये प्रयोग ज़रूर करना चाहिए। इस से उनको बहुत ही जल्दी फर्क मिलता हैं।

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