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Home»Achisosh»Ghamandi Pati Hindi Story Kahaniya | हिंदी कहानियाँ
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Ghamandi Pati Hindi Story Kahaniya | हिंदी कहानियाँ

By PeterNovember 21, 2023Updated:February 20, 20245 Mins Read
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Ghamandhhi Pati Hindi Story
Ghamandhhi Pati Hindi Story
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Ghamandi Pati Hindi Story – यूं तो दुनिया में एक से बढ़कर एक पति आपको देखने को मिल जाएंगे । हां आज की हमारी कहानी उन पतियों को समर्पित है जो अपनी पत्नियों को सिर्फ घर में काम करने वाली नौकरानी समझते हैं।

Yaha Padhe:

एक अच्छी पत्नी कैसे बनें

अच्छा पति कैसे बने

    Ghamandi Pati Hindi Story | घमंडी पति (Rude Husband) Hindi Story

    Ghamandhhi Pati Hindi Story
    Ghamandhhi Pati Hindi Story

    यार चंपक जब से तेरी शादी हुई है तेरी तब किस्मत पलट गई । आफिस में प्रमोशन बास की तरफ से नई कार । सच में यार तेरी बीवी तो लक्ष्मी  जिसके कदम बढ़ते ही तेरी दर लाटरी लग गई । अरब भगवान घरे तेरे जैसी बीवी सबको मिले ।

    एक बार मेरे घर में तूने मेरी बीवी के हाथों का बना खाना खा लिया । तू तो मेरी बीवी का चमचा बन गया । अरे दिन रात पसीना बहाकर आफिस में मेहनत मैच करता हूं । मेरी पत्नी ने मेरी तरक्की मैंने अपने दम पर की है । अरे तू है कि सारा क्रेडिट मेरी पत्नी को दे रहे ।

    किसी अच्छे डॉक्टर से अपना दिमाग का इलाज करवा ले । इस तरह चंपक हमेशा अपने घमंड में रहता था । सुनिए जी । अगले हफ्ते मेरी मौसी की बेटी की शादी है अच्छी बादर लेकिन मैं गई न जाने वाला समझो मेरे पास गुड्डा में मेरे मायके वाले हमें आने के लिए कह रहे हैं । सभी रिश्तेदार आ रहे हैं । हम नहीं गए तो बुरा लगेगा ना ।

    अरे तुम चले जाना । वैसे भी तुम क्या करते गाओ सारा दिन बेटी टीवी विक्रेताओ । हमारे यहां रहने नहीं रहने से पावर बनने वाला है अच्छा जी मेरे रहने नहीं रहने से कोई फिर पी और मैने सारे दिन बैठी टीवी देखती रहती हूं । हां वह भावना और घर की सारे काम वो मेरे गांव की सफेद साड़ी वाली चूड़े ना कर करती है ना । मैं अगर एक दिन याना रहूँगा तो पता नहीं तुम्हारा और

    इस घर का क्या होगा । चंपक हंसने लगता है । अच्छा था तुम भी इस गलतफहमी में जी रही हो कि तुम्हारे बिना मेरी जिन्दगी नहीं चल सकती । इसमें क्या शक्लें नहीं चल सकती । मेरी समझ में नहीं आता तुम औरतें ऐसा कौन सा तीर मारती हो चार रोटियां बना दी घर में झाड़ू को जगह दिया बस कितने ऐसे काम बाकी तो दौ घमंड अब ये सब काम मैं घर में एक कामवाली बाई औरत के भी करवा सकता हूं समझे ।

    गर पैसों से चलता है पैसा फेंको तमाशा देखो अपने पति की नजर में अपनी ये इज्जत देख प्रणिता को बड़ा बुरा लगता है और वो रोती हुई अपनी सास के पास चली जाती है ।

    अरे बेटी इस नालायक की बातों का बुरा मत मानकर तो फिक्र मत कर उसे रास्ते पर लाने का मेरे पास एक बेहद बढ़िया उपाय है तू ना कुछ दिनों के लिए अपने मायके चली जाए । फेरे देख तमाशा और वैसा ही होता है । प्राणी अपने मायके चली जाती है अगले दिन खर्चा तो महारानी अपने मायके चली गई ।

    अच्छा हुआ घर से मुसीबत टली प्राणी तो सोच रही होगी कि उसके बिना ये घर नहीं चलेगा । मैं बात पैसे कमाता हूं मुझे घर से गुजारा गया । घर के काम करने के लिए आज किसी कामवाली बाई को रख लेता हूं । चंपक एक कमली बाई रख लेता है कुछ दिनों के बाद अरे शांताबाई आज सब्जी में नमक थोड़ा ज्यादा लग रहा है और पराठे भी ठीक से नहीं बने । बस फिर क्या था ।

    इतना सुनते ही शांताबाई चिढ़ जाती है । देखो साहेब बेकार के नखरे मत टिकाना ये कामयाबी जास्ती बल्कि मेरा दिमाग खराब करने का मेरा कहना चुपचाप कालो मेरे पास टाइम नहीं है मुझे दूसरों के घर

    में भी काम करने को जाने निकाय । शांता बाई के तेवर देख चंपा की आंखे फटी की फटी रह जाती है लेकिन ये तुम क्या बोल रही हो । आखेट में मैं पैसे देता हूं । कम से कम खाना तो अच्छा बनाया करो । मैं तो इसे ही खाना बनाती है । अगर आपको पसंद नहीं है तो पैसे नहीं होगी । मेरे काम की कमी नहीं है समझे साहेब चल हूं । अगले दिन ।

    अरे ये क्या तुमने मेरी शर्ट प्रेस देगी मुझे ऑफिस जाना है । अरे नालायक इस बुढ़ापे में मेरे हाथ पैर नहीं चलते और तुम मुझसे अपनी चैट प्रेस करवाएगा । चंपक वही शर्ट पहनकर ऑफिस चला जाता है मीटिंग में बैठे सब लोग उसे देख हंसने लगते हैं अरे ये तुमने किस तरह के कपड़े पहन रखे हैं ।

    तुम इस तरह से मीटिंग में बैठोगे मेरे क्लाइंट के सामने मेरी बेसुध घरवाली तुमने । सर सर मेरी बात सुने मुझे कुछ नहीं सुना । आजकल तुम ऑफिस वर्क बनियान देख काम ठीक से नहीं करते और आज तो तुमने मेरे प्लाण्ट के सामने मेरी बेइज्जती करवा दी । तुम्हारी वजह से पिछला ऑर्डर भी हमारे हाथ से निकल गया था अब तुम भी आँसू निकल जाओ और हां वो कार की चाबी भी मुझे देते जाओ कल से तुम वापस सेल्समैन के काम पर लग जाओ ।

    इस तरह चंपक अपनी कंपनी में वापस सेल्समैन की उद्दे पर काम करने लगता है । प्रणिता के बिना चंपक की ज़िन्दगी अस्त व्यस्त हो जाती है । अरे बेवकूफ अब तक तो जैसे समझ में आ गया होगा कि पति पत्नी घडी की दो मुख्य सुइयों की तरह होते हैं । अगर एक भी सुई रुक जाए ना तो जिंदगी का बुरा दौर शुरू हो जाता है और हम वहीं के वहीं रह जाते हैं । चंपक समझ जाता है कि उसकी सफलता उसके अकेले की नहीं थी । उसकी पत्नी का भी बराबर का योगदान था और वो अपनी पत्नी के मायके जाकर उसे प्यार से वापस ले आता है ।

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