हलासन योग कैसे करें: विधि, लाभ एवं सावधानियां

हलासन में शरीर किसान के हल की तरह हो जाता है इसलिए इसे हलासन कहते है। इस योग के ज़रिए आप कई तरह की बीमाईयों को दूर कर सकते है। यह आसन गर्दन को सीधा और लचीला बनाने में काफ़ी महत्वपूर्ण है। हलासन के ज़रिए आप रीढ़ की हड्डी को लचीला और मोटापा दूर कर सकते है। त्वचा में चमक लाने के लिए अपनी रोजाना लाइफ स्टाइल में इस योग को शामिल करें। रोजाना शुबह हलासन करने से मन में काम करने की इच्छा बढ़ेगी। इसके साथ-साथ आपका तनाव दूर होगा और आप निरोगी बनेंगे। तो चलिए जानते हैं कैसे हलासन योग को करें और इसस होने वाले स्वास्थ लाभ क्या हैं। Halasan yoga steps and benefits in hindi.

Halasana Yoga kaise Kare, Iske fayde

हलासन योग विधि – Halasana Yoga in Hindi

Step 1: सुबह-सुबह स्पाट ज़मीन पर दरी बिछाकर लेट जाएँ और कुछ देर तक मन को शांत रखें।

Step 2: अब आप पीठ के बल लेट जाए और अपने दोनों हाथों को बगल में सीधा और ज़मीन से सटाकर रखें।

Step 3: फिर दोनों पैर को आपस में मिलकर रखें और एड़ी-पंजो को भी मिलकर रखें।

Step 4: अब दोनो परियों को धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठाए, पैरों को उठाने के क्रम में पहले 30, 60 फिर 90 डिग्री का कोण बनाते हुए पैरों को सिर के पीछे की ओर ज़मीन पर लगाए और पैरों को बिल्कुल सीधा रखें।

Step 5: अपने हाथ को सीधा ज़मीन पर ही टीका रहने दें। इस अवस्था में आने के बाद थोड़ी सीने के ऊपर के भाग पर लग जाएगी।

Step 6: हलासना की पूरी अवस्था बन जाने के बाद 8-10 सेकेंड तक इसी अवस्था में रहे और साँस लेते और छोड़ते रहे।

Step 7: फिर वापस सामान्य अवस्था में आने के लिए घुटनों को बिना मोड़े ही गर्दन और कंधो पर ज़ोर देकर धीरे-धीरे पैरों को दोबारा अपनी जगह पर लाए।

हलासन करने से लाभ – Halasana Health Benefits in Hindi 

1- हलासन के रेग्युलर एक्सरसाइज से मेरुदण्ड को मजबूत और लचीला बनता है।

2-जिन लोगों को मधुमेह का रोग हो उनके लिए बहुत ही लाभदायक होता है।

3- पेट में जमी अनावश्यक चर्बी को कम करता है। वजन कम करने मे बहुत ही लाभदायक होता है।

4- जिनके पाचन क्रिया में प्रॉब्लम हो उनके लिए बहुत ही लाभकारी होता है।

5- प्रजनन के लिए लाभकारी है।

6- गर्दन, कंधे, पेट, पीठ और कमर के स्नायु को मजबूत बनाता है।

7- पेट को बाहर निकालने से रोकता है और शरीर को सुडौल बनता है।

8- अनिद्रा, बांझपन, सिरदर्द, थायराइड के विकार में यह आसन करने से लाभ मिलता है।

सावधानियां:

दिल के रोगी, हाइ ब्प और लो ब्प के मरीजों को ये आसन नहीं करना चाहिए। इसे कभी भी झटके के साथ नहीं करें। पहले अपने पैर बस 30 डिग्री तक ही उठाए और वापस ले जाए। फिर पैरों को 90 डिग्री तक उठाए और वापस ले जाए। 3 बार में पैरों को पूरी तरह से पीछे ले जाए।

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