दमा रोग का इलाज के घरेलू उपाय और आयुर्वेदिक नुस्खे

दमा रोग को अस्थमा के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी में सांस का फूलना या सांस लेने में दिक्कत की समस्या आती है। यह बच्चे, बूढ़े, महिला या पुरुष किसी को भी हो सकता है। दमा होने पर सांस लेने वाली नलिकाएं सिकुड़ने लगती हैं जिससे सांस लेने में दिखात होती है। सही समय में आपने दमा के लक्षण को पहचान लिया तो इसके इलाज सही तरह से हो सकता है। इस बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए आप आयुर्वेदिक दवा ले सकते हैं इसलिए आज हम आपको अस्थमा (डीएमए) के उपचार के लिए देसी आयुर्वेदिक नुस्खे बताने जा रहे हैं।

जिंदा रहने के लिए सांसो का चलना बहुत ज़रूरी है। सांसो पर ही हमारा जीवन टीका हुआ है। नाक के ज़रिए ऑक्सीजन फेफड़ो तक जाती है और कॉर्बन-डाई-ऑक्साइड के रूप मे नाक से निकलती है, ये एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। लेकिन इस natural process में जब सांसो की गति बढ़ने लगती है और इंसान को बेचैनी होने लगती है तब इसे दमा रोग कहा जाता है। दमा एक खतरनाक रोग है जिसका टाइम रहते बचाव करना ज़रूरी है नही तो इस रोग से जान को भी ख़तरा हो सकता है।

Saans Rukna - Dama Rog ke Lakshan aur Gharelu Upchar - दमा(Asthma) का सम्पूर्ण इलाज

दमा (अस्थमा) रोग होने के कारण – Causes Behind Asthma in Hindi

अस्थमा (दमा) का अटॅक आने के बहुत सारे कारण में वायु प्रदुषण भी एक प्रमुख कारण है। दमा के अटॅक के दौरान वायु मार्ग के आस पास के musculus में कसाव और वायु मार्ग मे सूजन आ जाता है। दमा रोगी को सान लेने से ज़्यादा साँस छोड़ने मे मुश्किल होती है। Elergy के कारण गले में बलगम पैदा हो जाता है जो कष्ट को और भी बड़ा देता है। Elergy के अलावा भी दमा होने के बहुत से कारणों में से कुछ इस प्रकार है..

  1. घर के धूल भरा वातावरण
  2. घर के पालतू जानवर
  3. बाहर का air pollution
  4. perfumed cosmetic
  5. सर्दी, फ़्लू, ब्रॉंकाइटिस और सिनसिटीस का संक्रमण
  6. smoking
  7. ज़्यादा शराब पीना
  8. तनाव या दर के कारण
  9. जंक फुड खाने के कारण
  10. ज़्यादा नमक खाने के कारण
  11. हेरिडिटी के कारण.

दमा रोग के लक्षण – Symptoms of Asthma in Hindi

दमा के लक्षण की बारे मे बात करते ही पहली बात जो मन में आती है वह है साँस लेने मे कठिनाई। दमा का रोग या तो अचानक शुरू होता है या खाँसी, छींक या सर्दी जैसे एलेर्जी वाले लक्षणों से शुरू होती है।

  • साँस लेने मे कठिनाई होती है।
  • सीने मे जकड़न जैसा महसूस होता है।
  • दमा का रोगी जब साँस लेता है तब एक घरघराहट जैसी आवाज़ होती है।
  • साँस तेज लेते हुए पसीना आने लगता है।
  • बेचैनी जैसी महसूस होती है।
  • सिर भारी-भारी जैसा लगता है।
  • ज़ोर-ज़ोर से साँस लेने के कारण थकावट महसूस होती है।

अस्थमा का इलाज के घरेलू उपाय और आयुर्वेदिक नुस्खे

Dama Ke Gharelu Upchar and Ilaaj - Asthma se bache

1. 1 लीटर पानी मे 2 बड़े चम्मच मेथी के दाने डालकर आधा घंटे तक उबालें उसके बाद इसको छान लें। 2 बड़े चम्मच अदरक का पेस्ट एक छलनी में डालकर उस रस निकाल कर मेथी के मथिक के पानी मे डाले। उसके बाद एक चमच शूध शहद इस मिक्स मे डालकर अच्छी तरह से मिला ले। दमा के रोगी को यह मिश्रण रोज शुबह पीना चाहिए।

2. 2 छोटे चम्मच आंवला का पाउडर एक कटोरी में ले और उसमें एक छोटा चम्मच शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें। हर रोज शुबह इस मिश्रण का सेवन करें।

3. 1 कटोरी में शहद ले और उसको सूंघने से दमा के रोगी को साँस लेने मे आसानी होती है।

4. ज़रूरत के अनुसार सरसो के तेल में कपुर डालकर अच्छी तरह से गर्म करें। उसको एक कटोरी में डालें फिर उस मिश्रण में मिश्रण थोड़ा सा ठंडा हो जाने के बाद सीने और पीठ मे मालिश करें। दिन मे कई बार से एस तेल से मालिश करने पर दमा के लक्षणों से कुछ हद तक आराम मिलता है।

5. लहसुन दमा के इलाज में काफी कारगर साबित होता है। 10-15 लहसुन का कलियाँ दूध में डालकर कुछ देर तक उबालें। उसके बाद एक गिलास मे डालकर गुनगुना गर्म ही पीने की कोशिश करे। इस दूध का सेवन दिन मे एक बार करना चाहिए।

6. गरमागरम कॉफी पीने से भी दमा के रोगी को आराम मिलता है क्यूंकी इससे साँस वाली नली को सॉफ करके साँस लेने की प्रक्रिया को आसान करता है।

7. एक कटोरी मे एक छोटा चमच अदरक का रस, अनार का रस और शहद डालकर अच्छी तरह से मिला लें। इसके बाद एक बड़ा चम्मच इस मिश्रण का सेवन दिन मे 4 से 5 बार करने से दमा के लक्षणों से राहत मिलती है।

8. एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से एलेर्जी से बचते हैं और अस्थमा कण्ट्रोल में रहता है।

9. पानी में तुलसी के पत्ते डालकर पीस लें फिर इसमें दो चम्मच शहद मिलाये और फिर सेवन करें। इससे दमा रोग से आराम मिलता है।

10. पीपल के पत्ते छांव में सुखाकर सूखे पत्ते किसी बर्तन में डालकर जला लें। फिर इसे कपडे से छान लें और शहद में मिलकर चाट लें। इस उपचार को आप दो से तीन महीने रोजाना करें आपको दमा से आराम मिलेगा।

दमा से बचाव:

जाड़े के मौसम में ठंड के कारण दमा का रोग भयंकर रूप धारण करता है। इसलिए इस टाइम एन घरेलू उपचारो के हेल्प से दमा रोग के कष्ट को तो काफी हद तक काबू मे किया जा सकता है, साथ ही कुछ बातों पर ध्यान से दमा रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है।

  • घर को हमेशा सॉफ रखे ताकि धूल से एलेर्जी की संभावना ना हो।
  • योगा-व्यायाम और मेडिटेशन के ज़रिए खुद को शांत रखे।
  • मूह से साँस ना लें क्यूंकि मुंह से साँस लेने पर ठंड भीतर चला जाता है जो रोग को बढ़ने मे हेल्प करता है।
  • भोजन में मिर्च-मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • मानसिक परेशानी, तनाव, क्रोध तथा लड़ाई-झगडों से बचना चाहिए।
  • शराब, तम्बाकू तथा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।

दमा का घरेलू आयुर्वेदिक उपचार – Ayurvedic Treatment of Asthma in Hindi

  • 5 लौंग लें और १ बड़े गिलास पानी में 5 मिनट तक उबालें। इस मिश्रण को छानकर इसमें एक चम्मच शहद मिलाएँ और गरम-गरम पी लें। हर रोज दो से तीन बार यह काढ़ा बनाकर पीने से मरीज को निश्चित रूप से लाभ होता है।
  • 1/4 चम्मच सोंठ, छ: काली मिर्च, काला नमक 1/4 चम्मच, तुलसी की 5 पत्तियों को पानी में उबाल कर पीने से भी दमा में आराम मिलता है।
  • एक कटोरी में दो चम्मच आवला पाउडर डालें और उसमे एक चम्मच शहद मिलाकर अच्छे से मिला लें। रोजाना सुबह इसका सेवन करने से दमा को कम किया जा सकता है।
  • 180 मिमी पानी में मुट्ठीभर सहजन की पत्तियां मिलाकर करीब 5 मिनट तक उबालें। मिश्रण को ठंडा होने दें, उसमें चुटकीभर नमक, कालीमिर्च और नीबू रस भी मिलाया जा सकता है। इस सूप का नियमित रूप से इस्तेमाल दमा उपचार में कारगर माना गया है।
  • अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है। सबेरे और शाम इस चाय का सेवन करने से मरीज को फायदा होता है।

 

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